एक बहुत ही गोपनीय प्रयोग बता रहे है। संभालकर रख ले।
अमावस्या के दिन एकांत स्थान पर चले जाए। छोटी छोटी आम की लकड़ी साथ में ले जाए। अपने घर पर ये प्रयोग नहीं करना है। साथ में 3 मुट्ठी बराबर काले तिल और एक गुलाब के इत्र की शीशी ले जाना है। कुमकुम,हल्दी और सिंदूर ले जाना है। कपूर और मिट्टी का एक छोटा सा बर्तन ले जाना है। सफेद मिठाई का एक टुकड़ा ले जाना है।
एकांत जगह जैसे नदी का किनारा, तालाब के पास या चौराहे या फिर जंगल में जाकर प्रयोग करें। अपने साथ में किसी को ले जा सकते है। सेफ्टी की व्यवस्था स्वयं कर ले।
अब आपको एकांत में जमीन पर आपको हल्दी से अष्टदल कमल बनाना है। कमल के बीच में अधोमुखी त्रिकोण सिन्दूर से बनाना है और बीच में कुमकुम भर लेना है। त्रिकोण और कमलों के बीच में। जैसा आपको डिजाइन आए उसी अनुसार अच्छा बना लें।
पास में आसान लगाकर बैठ जाए त्रिकोण के बीच में मिट्टी का बर्तन रख दे और थोड़ी आम की लकड़ी और कपूर जलाकर अग्नि प्रज्वलित करें।
अब आपको नीचे दिया हुआ मंत्र बोलते जाना है और चुटकी भर काले तिल अग्नि में डालते जाना है जब तक सब तिल समाप्त न हो जाए। तिल समाप्त होने के बाद इत्र की शीशी से इत्र सब अग्नि में डाल दे और थोड़ा थोड़ा मिठाई भी छोटे छोटे टुकड़े करके डाल दे।
अंत में आपकी इच्छा 3 बार जोर से बोलकर 3 चुटकी बजाए और घर आ जाए। 3 अमावस्या में ही कामना पूर्ण हो जाएगी। कामना ऐसी करो जो पूर्ण हो सके। जो वास्तविक हो। कपोल कल्पित कल्पनाएं पूर्ण नहीं होती।
मंत्र। ॐ ह्रीं क्लीं हूं हूं मम कामना सिद्धिम कुरु कुरु ह्रीं क्लीं हूं हूं फट स्वाहा।
केवल गुरु दीक्षित साधक करे। आपके साथ होने वाली प्रत्येक घटना के लिए जिम्मेदार आप स्वयं हो।
इसी प्रयोग में कुछ विशेष साधना सामग्री एड करके इसी प्रकार से एक विशेष प्रयोग से विशेष शक्ति की सिद्धि भी प्राप्त की जा सकती है। उसमें कुछ विशेष सामग्री चाहिए। जो ज्यादातर जल्दी मिलती नहीं है।
श्री सीताराम विजयते 🚩
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