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जिनमें मुख्य रूप से आलिंगन (Embrace) के 12 प्रकार प्रमुख हैं जैसे स्तनों का आलिंगन उरु (जांघों) का आलिंगन और अन्य प्रेमपूर्ण स्पर्श जो मिलन की तीव्रता और आनंद को बढ़ाने के लिए होते हैं और ये सभी प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं (Avastha) और भावनाओं से जुड़े होते हैं....
कामसूत्र के अनुसार स्पर्श के कुछ प्रमुख प्रकार (आलिंगन के संदर्भ में)
स्तन-आलिंगन (Stana-alingana): प्रेमिका के स्तनों को छाती से लगाना....
उरु-आलिंगन (Uru-alingana): जांघों को कसकर गले लगाना या दबाना...
पार्श्व-आलिंगन (Parshva-alingana): कमर या बगल से आलिंगन करना...
पृष्ठ-आलिंगन (Prishtha-alingana): पीठ से आलिंगन करना....
अंग-आलिंगन (Anga-alingana): पूरे शरीर को सटाकर आलिंगन करना...
कंठ-आलिंगन (Kantha-alingana): गले लगाना जो स्नेह और सम्मान का प्रतीक है...
पुष्प-आलिंगन (Pushpa-alingana): फूलों की माला की तरह कोमलता से आलिंगन करना...
पार्श्व-पद्म-आलिंगन (Parshva-padma-alingana): एक विशेष प्रकार का आलिंगन जिसमें हाथ शरीर के आस-पास होते हैं....
उरु-पद्म-आलिंगन (Uru-padma-alingana): जांघों के पास कोमलता से स्पर्श करना....
संयोग-आलिंगन (Samyoga-alingana): पूर्ण संभोग के दौरान होने वाला आलिंगन....
विपरीत-आलिंगन (Viparita-alingana): विपरीत दिशाओं में या असामान्य तरीके से आलिंगन करना....
नखक्षत (Nakhakshata) और दंतकर्म (Dantakarma): नाखूनों से हल्के खरोंच (नखक्षत) और दांतों से कोमल दंश (दंतकर्म) भी स्पर्श के ही प्रकार हैं जो कामोत्तेजना बढ़ाते हैं...
संक्षेप में कामसूत्र में स्पर्श को केवल एक क्रिया नहीं बल्कि भावनाओं और प्रेम की गहराई को व्यक्त करने का एक कलात्मक और व्यवस्थित तरीका माना गया है जिसके कई सूक्ष्म भेद हैं....
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