भावुक लोगों को जितना हो सके कम ही मित्र बनाने चाहीए क्योंकी जो अधिक भावुक होगा वो हृदय से जुड़ जाता है जिसको भी अपना मित्र बनाता है उनसे क्योंकी भावुक जो भी होगा उसकी ऊर्जा अधिकतर हृदय चक्र पर होती है जबकी धरती पर माता को छोड़कर लगभग मनुष्यों की चेतन शक्ति मूलाधार पर ही अटकी होती है इसी कारण समाज में अधिकांश लोग अक्सर भावुक लोगों से मात्र अपनी स्वार्थसिद्धि के लिऐ जुड़ते हैं !
अत: सभी अपना स्वभाव जानते हैं किंतु आसानी से मानते नहीं !
भावुक लोग जो होते हैं वो ठोकरें खा-२ कर , धोखे खा-२ कर,,,सबके बारे में अच्छा सोचने पर भी जब दुत्कार और फटकार ही खाते हैं तो वो भी पक्के हो ही जाते हैं और यही दुत्कार और फटकारें ईश्वर की कृपा समझनी चाहीए भावुक लोगों को और जो खुद को अधिक होशियार समझते हैं वो मरते दम तक नहीं समझते और ना ही अपनी आदतों को छोड़ते हैं और जीवन पर्यंत हमेशा मुसिबतों से घिरे रहते हैं !
दोष हमारे खुद के भीतर होते हैं और हमेशा दूसरों को दोष देते रहते हैं !
भावुक व्यक्ति का सबसे बड़ा दोष होता है की वो बड़ी जल्दी लोगों की बातों पर विश्वास कर लेते हैं और फिर जब धोखा मिलता है तो अपने हृदय को दिलासा देने के लिऐ सोचते हैं की हमारे कोई पाप होंगे जो हमारे साथ ऐसा हुआ वैसे वो लोग एक तरफ से सही भी सोचते हैं की पाप होंगे तभी दण्ड भी मिला किंतु वास्तव में कुछ ओर ही कारण होता है और वो ये की भावुक लोग किसी को अपने जैसा समझ लेते हैं और जो छल-कपट करने बाले होते हैं वो अपने छल-कपट को Smart Work कहकर अपने दोषों को ढंकते रहते हैं !
अब भावुक लोगों को यदि मेरे लिखे से कुछ समझ आऐ तो अच्छा है यदि ना समझ आए तो धोखे और ठोकरें खाकर तो समझ ही जाओगे और जो अपने छल-कपट को Smart Work का नाम देते हैं वो इस बात को स्मरण रखें आपका ये Smart Work एक दिन आपसे इतना Hard work करवाएगा जितना आपके लिए दूसरा कर रहा है ,,,
ऊर्जा एक ही सिद्धांत पर चलती है जैसा हम किसी को देंगे वैसा ही हमारे पास लौटता भी है यदि हमारे Smart Work से किसी को पीड़ा हो रही है तो वो पीड़ा एक ना एक दिन हमारे पास अवश्य लौटेगी और हमारा Hard Work किसी को खुशी दे रहा है तो वो खुशी भी हमारे पास अवश्य लौटती है !
मुख्य :- भावुक और षड़यंत्रकारी लोगों में से भावुक लोग कुछ हद तक सही हैं क्योंकी भावुक लोग एक दिन इस संसार को समझकर संसार से विरक्त होकर मुक्त हो सकते हैं किंतु षड़यंत्रकारी लोग जीवन भर यही समझते रहते हैं की वो बहुत Smart 🤓 हैं ,ऐसे Smart लोगों की भीड़ अधिक रही है धरती पर और ये भीड़ ही माया के अस्तित्व को बनाये हुई है ,,,,माया का स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं उसके अस्तित्व के सूत्रधार हम स्वयं हैं ,,,, छल-कपट-षड़यंत्रों से भरी मनुष्य की बुद्धि ही माया है जो वास्तव में है तो Ugly किंतु मायावी मानता उसे Smart है !
शिवशक्ति नमस्तुभ्यम् 🕉️
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