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कुंडली जागरण विधि का चक्रों को जागृत करने की प्रक्रिया असल में शरीर और मन को 'ट्यून' करने जैसा है। हम 'मूलाधार चक्र' से शुरुआत कर सकते हैं, क्योंकि यह बाकी सभी चक्रों की नींव है।

चक्रों को जागृत करने की प्रक्रिया असल में शरीर और मन को 'ट्यून' करने जैसा है। चूँकि आपने सरल विधि पूछी है, तो हम 'मूलाधार चक्र' से शुरुआत कर सकते हैं, क्योंकि यह बाकी सभी चक्रों की नींव है।


जब तक नींव मजबूत नहीं होगी, ऊपर के चक्रों की ऊर्जा संभालना कठिन होता है।

मूलाधार चक्र की साधना

यह चक्र रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है। इसका रंग लाल है और इसका तत्व पृथ्वी है।

1. जागृत करने की सरल विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)

आसन: एक शांत जगह पर सुखासन (पालथी मारकर) बैठ जाएं। अपनी रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें।

मुद्रा: अपने हाथों को 'ज्ञान मुद्रा' (अंगूठे और तर्जनी उंगली के पोरों को मिलाकर) में घुटनों पर रखें।

ध्यान: अपनी आँखें बंद करें और अपना पूरा ध्यान रीढ़ के सबसे निचले हिस्से (जहाँ आप जमीन को स्पर्श कर रहे हैं) पर केंद्रित करें।

विजुअलाइजेशन (कल्पना): कल्पना करें कि उस स्थान पर एक गहरे लाल रंग का प्रकाश का गोला घूम रहा है।

बीज मंत्र का जप: गहरी सांस लें और छोड़ते समय 'लं' 
शब्द का उच्चारण करें। इस ध्वनि के कंपन को सीधे अपने मूलाधार स्थान पर महसूस करने की कोशिश करें।

समय: इसे प्रतिदिन 5 से 10 मिनट तक करें।

2. मूलाधार चक्र जागृत होने के फायदे
जब यह चक्र संतुलित या जागृत होने लगता है, तो व्यक्ति के जीवन में ये बदलाव आते हैं:-

डर से मुक्ति: व्यक्ति के भीतर से असुरक्षा की भावना खत्म हो जाती है। वह हर स्थिति में निडर और स्थिर महसूस करता है।

शारीरिक ऊर्जा: आलस्य दूर होता है और शरीर में नई स्फूर्ति महसूस होती है।

आर्थिक स्थिरता: माना जाता है कि जिसका मूलाधार मजबूत होता है, वह भौतिक जगत के कार्यों (करियर, पैसा) में अधिक सफल और व्यावहारिक होता है।

एकाग्रता: मन भटकना बंद कर देता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

एक और महत्वपूर्ण चक्र: 'आज्ञा चक्र'

यदि आप मानसिक शक्ति और अंतर्ज्ञान बढ़ाना चाहते हैं, तो 'आज्ञा चक्र' पर ध्यान दिया जाता है।

स्थान: दोनों भौंहों के बीच (जहाँ तिलक या बिंदी लगाते हैं)।

बीज मंत्र: 'ॐ' ।

फायदा: इसे जागृत करने से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होने लगता है और याददाश्त बहुत तेज़ हो जाती है।

साधना के दौरान कुछ जरूरी बातें:-

निरंतरता: तंत्र में 'सिद्ध' होने का अर्थ है निरंतर अभ्यास। एक-दो दिन में परिणाम नहीं मिलते, इसे अपनी जीवनशैली बनाना पड़ता है।

सात्विकता: चक्र साधना के दौरान हल्का और शुद्ध भोजन करना सहायक होता है।

जल्दबाजी न करें: जबरन ऊर्जा को ऊपर खींचने की कोशिश न करें, इसे प्राकृतिक रूप से बहने दें।

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