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स्वर्ग से आए हैं तीन फूल अपराजिता, पारिजात और मधुकामिनी, जानिए मधुकामिनी क्या है?

स्वर्ग से आए हैं ❤️💯तीन फूल अपराजिता, पारिजात और मधुकामिनी, जानिए मधुकामिनी क्या है? 🇮🇳
मधुकामिनी के फूल गर्मियों में खिलते हैं।🖊️ घर में अगर एक बार आपने कामिनी के फूल का पौधा लगा दिया तो ४-५ वर्ष या इससे अधिक समय तक फूल आते रहेंगे। सौंधी और मनमोहक खुशबू के कारण इसे अपने घर की बालकनी में लगाना बहुत ही आसान है। 
मधुकामिनी प्लांट को सबसे अच्छे इनडोर और आउटडोर पौधों में से एक माना जाता है। वास्तु के अनुसार यह प्लांट घर-आंगन को खुशियों से भर सकता है।जरूरी बात यह है कि यह कम रखरखाव वाला पौधा है और इसमें सुगंधित फूलों के गुच्छे होते हैं जो सुंदर ति‍तलियों और चिड़ियों को बहुत आकर्षित करते हैं। 
मधुकामिनी फूल का वनस्पति नाम है मुराया पैनीकुलेटम। यह एक सफेद रंग का फूल है जो घर की सज्जा के साथ औषधि के लिए भी प्रयोग किया जाता है

खूशबूदार फूलों में से मधुकामिनी दिन रात महकने वाला प्लांट है। यह एक सदाबहार झाड़ीनुमा पौधा है जिसका आकार ५-१५ फिट तक होता है। नारंगी यानी संतरा जैसी सुगंध आने के कारण इसको ऑरेंज जैस्मीन नाम से भी जाना जाता है। इसके फूलों का रंग सफेद होता है! 
इसके फूलों की मनभावन सुगंध मानसिक तनाव को दूर करने वाली होती है! 

 मान्यता है कि जो तीन फूल स्वर्ग से आए हैं उसमें अपराजिता, पारिजात के साथ तीसरा फूल मधुकामिनी ही है... 

 
मधुकामिनी के लाभ

इसके मात्र २ पत्तों को उबाल कर पीने से श्वास रोग में बहुत ज्यादा लाभ होता है। गला साफ़ होता है। 

 इसके फूलों को बेडरूम में रखने से दाम्पत्य जीवन सुखी रहता है। ऐसा माना गया है।

 मधुकामिनी की पत्तियां शुभकारी होती हैं इसीलिए विवाह मण्डपों में इसका प्रयोग होता है। 

 तमिल भाषा में इसे वेंगराए और तेलगु में नागागोलुंग , मराठी में कुंती तो मणिपुरी में कामिनी कुसुम कहा जाता है। कन्नड़ में काडु कारिबेयु तो मलयालम में मारामुला कहा जाता है।
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