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क्या फायदा? जब तक अपने अंदर की योगिनी को नहीं समझा, तब तक सब बाहरी है। बाहरी कभी असली नहीं होता। जाने क्या है काम और ब्रम्हचर्य में अन्तर! || KAM SHASTRA ||

🔱 महादेव का वचन – जो काम को समझ गया, उसने सब कुछ समझ लिया 🔱 

नमस्ते दोस्तों,

आज मैं आपको श्री महादेव के उस वचन के बारे में बताने जा रहा हूँ जो हमारी सोच को पूरी तरह बदल देता है। यह कोई साधारण बात नहीं है। यह वह रहस्य है जिसे समझे बिना सारी साधनाएँ, सारे अनुष्ठान, सारी पूजाएँ अधूरी रह जाती हैं.  
📜 महादेव का वचन – शास्त्र का प्रमाण( योनि तंत्र )

"पापात्मा मैथुने यस्य घृणा स्याद् रक्तरेतसोः।
पाने भ्रान्तिर्भवेद् यस्य भेदबुद्धिश्च साधके॥"

अर्थात – जो व्यक्ति पापी है, जिसे मैथुन (संभोग) से घृणा है, जो रक्त (मासिक धर्म) और वीर्य (शुक्र) से भ्रमित रहता है, तथा जिसे साधकों में ऊँच-नीच की भेदबुद्धि होती है – ऐसे दुरात्मा व्यक्ति की गति क्या होगी?

महादेव यहाँ स्पष्ट कर रहे हैं कि जो प्रकृति के इन मूलभूत सत्यों से घृणा करता है, जो शरीर के इन स्वाभाविक प्रक्रियाओं को अपवित्र समझता है – वह वास्तव में पापी है। क्योंकि वह उस दिव्य रचना का अपमान कर रहा है जो स्वयं परमात्मा ने बनाई है।

🌿 काम को शत्रु न बनाओ – उसे समझो

जिन्होंने स्वयं को जाना, उन्होंने काम को कभी शत्रु नहीं बनाया। उन्होंने ब्रह्मचर्य को जबरदस्ती नहीं थोपा। उन्होंने इस ऊर्जा को समझा। वे काम के प्रति भी साक्षी बनकर खड़े रहे – न तो उसमें डूबे, न उससे भागे। उन्होंने उसे भी जान लिया।

काम को पाप मत समझो। यह परमात्मा का प्रसाद है। यह वही शक्ति है जिससे सारी सृष्टि चल रही है। यह वही ऊर्जा है जो तुम्हारे भीतर भी है। जब तुम इससे भागोगे, यह तुम्हें खींचेगी। जब तुम इससे लड़ोगे, यह तुम्हें हराएगी। पर जब तुम इसे समझोगे, तो यह तुम्हारी सबसे बड़ी शक्ति बन जाएगी।

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🔥 तुम परमात्मा हो – शरीर केवल साधन है

यह सबसे गहरी बात है – तुम परमात्मा हो। शरीर केवल साधन है, खुद को जानने का, अनुभव करने का, इस सृष्टि को भोगने का।

जब तक तुम अपने आप को सिर्फ शरीर समझते रहोगे, तब तक काम तुम्हारा स्वामी रहेगा। पर जब तुम अपने आप को उस चेतना के रूप में जान लोगे जो शरीर में है, तो काम तुम्हारा सेवक बन जाएगा।

वरना करते रहो पूजाएँ, अनुष्ठान, हवन, यज्ञ। लगाते रहो ६४ योगिनी को भोग। क्या फायदा? जब तक अपने अंदर की योगिनी को नहीं समझा, तब तक सब बाहरी है। बाहरी कभी असली नहीं होता।

💫 असली साधना क्या है? || KAM SHASTRA ||

असली साधना मंदिर में नहीं, अपने शरीर में है। असली योगिनी तुम्हारे भीतर है। असली शक्ति तुम्हारी रीढ़ में सोई हुई है। उसे जगाने के लिए बाहर कुछ नहीं करना। बस अपने भीतर उतरना है। बस अपने शरीर को समझना है। बस अपनी ऊर्जा को पहचानना है।

काम वह दरवाजा है जहाँ से यह ऊर्जा बाहर जाती है। ब्रह्मचर्य उस दरवाजे को बंद करना नहीं है। ब्रह्मचर्य उस ऊर्जा को ऊपर की ओर मोड़ना है। और यह तभी संभव है जब तुम काम को समझो, उससे घृणा न करो, उसे अपवित्र न समझो।

🌺 महादेव का संदेश

महादेव कह रहे हैं – जो काम से घृणा करता है, वह पापी है। क्योंकि वह उस दिव्य रचना का अपमान करता है जो मैंने बनाई है। जो रक्त और वीर्य से भ्रमित है, वह अज्ञानी है। क्योंकि वह उस शक्ति को नहीं पहचानता जिससे सारा जीवन पनपता है।

साधकों में भेदबुद्धि रखना सबसे बड़ा पाप है। जो एक साधक को ऊँचा और दूसरे को नीचा समझता है, वह कभी सत्य तक नहीं पहुँच सकता।

सच तो यह है – सब एक है। शरीर एक है, ऊर्जा एक है, चेतना एक है। बस समझने की देर है।

🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏

👇 क्या आप काम को परमात्मा का प्रसाद मानते हैं? कमेंट में जरूर लिखें। || KAM SHASTRA ||

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