|| BHOOMI VANDANA || शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी को ‘माता’ माना जाता है और किसी भी माता के ऊपर पैर रखना अपमानजनक माना जाता है, इसलिए सुबह उठकर भूमि वंदना करके क्षमा मांगना अनिवार्य है। पृथ्वी माता ने सृष्टि को धारण किया है और अन्न, जल, औषधि, फल-फूल और आश्रय सहित सभी सुख-सुविधाएँ हमें प्रदान करती हैं, इसलिए हम उसकी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए उसका सम्मान करते हैं।
व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसकी महत्वपूर्ण वजहें हैं:
स्वास्थ्य लाभ: सोते समय शरीर का तापमान बढ़ जाता है, और बिस्तर से उतरते ही सीधे ठंडी जमीन पर पैर रखने से शरीर में अचानक गर्म-सर्दी का प्रवाह हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है; भूमि वंदना से यह तापमान संतुलन बना रहता है।
मानसिक शिक्षा: यह रीति इंसान को अहंकार से दूर रखकर सहनशील, धैर्यवान और क्षमाशील बनने का संदेश देती है, क्योंकि धरती माता कभी क्रोध नहीं करती भले ही उस पर कितना भी आघात क्यों न किया जाए।
विधि और मंत्र: शास्त्रों में निर्देश है कि दाएं पैर को भूमि पर रखकर हाथ से पृथ्वी का स्पर्श करके उसे मस्तक पर लगाया जाना चाहिए। इस समय ‘समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे’ मंत्र का जाप करना चाहिए, जिसका अर्थ है— “हे विष्णुपत्नी!
तुम समुद्र के वस्त्र और पर्वतों के स्तनों से शोभित हो, मेरे पैरों के स्पर्श के लिए मुझे क्षमा करें।”
ध्यान रखने योग्य बातें:
भूमि वंदना केवल सुबह उठने पर नहीं, बल्कि नए घर में प्रवेश, पूजा शुरू करने, यात्रा पर निकलने और नए कपड़े पहनने जैसे अवसरों पर भी की जाती है।
दीपक, शिवलिंग, पुस्तक, यज्ञोपवीत जैसी पवित्र वस्तुओं को कभी भी भूमि पर नहीं रखना चाहिए और ग्रहण के समय भूमि को नहीं खोदना चाहिए।
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