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​त्राटक के दौरान मानसिक रूप से इस मंत्र का जाप करें.

क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखों में अपार सम्मोहन और संकल्प शक्ति छिपी है? तंत्र शास्त्र की यह विधि न केवल आपकी एकाग्रता बढ़ाएगी, बल्कि आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही आकर्षण पैदा कर देगी।
​त्राटक साधना में जब ध्वनि (मंत्र) और दृष्टि (त्राटक) का मिलन होता है, तो आज्ञा चक्र पर कंपन पैदा होता है। यही वह बिंदु है जहाँ से 'अतीन्द्रिय क्षमताएं' विकसित होती हैं।
​1. सिद्ध मंत्र 
​त्राटक के दौरान मानसिक रूप से इस मंत्र का जाप करें:
​मंत्र: ॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं आज्ञा चक्र जाग्रयाय नमः ॥
​अर्थ: इस मंत्र में 'ह्रीं' शक्ति का, 'श्रीं' समृद्धि का और 'क्लीं' आकर्षण का बीज मंत्र है। यह आज्ञा चक्र को सक्रिय करने के लिए एक संपूर्ण चाबी है।
​2. साधना की पूर्ण विधि
​समय: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) या रात्रि के 10 बजे के बाद का समय सर्वश्रेष्ठ है।
​तैयारी: सामने एक दीपक जलाएं (घी का हो तो उत्तम)। दीपक की लौ आपकी आंखों के बिल्कुल समानांतर (Level) होनी चाहिए।
​प्रक्रिया:
​दीपशिखा (लौ) के सबसे ऊपरी और चमकते हुए हिस्से पर अपनी दृष्टि टिका दें।
​मन ही मन ऊपर दिए गए मंत्र का निरंतर जप करें।
​जब आंखों से आंसू निकलने लगें, तो आंखें बंद कर लें।
​बंद आंखों से अपनी दोनों भौहों के बीच (Third Eye) उस लौ को देखने का प्रयास करें। मंत्र जप बंद आंखों में भी जारी रहना चाहिए।
​3. साधना के 3 मुख्य चरण 
​बाह्य त्राटक: दीपक या बिंदु को खुली आंखों से देखना।
​अंतः त्राटक: आंखें बंद करके उस छवि को मन में स्थिर करना।
​शून्य त्राटक: जब न दीपक रहे न मंत्र, बस एक असीम शांति और प्रकाश का अनुभव हो।

​⚠️ महत्वपूर्ण नियम और सावधानी
​"साधना में सफलता निरंतरता से मिलती है, जल्दबाजी से नहीं।"
​ब्रह्मचर्य: साधना काल के दौरान सात्विक भोजन और मानसिक पवित्रता बनाए रखें।
​धैर्य: पहले दिन ही चमत्कार की उम्मीद न करें। कम से कम 21 या 41 दिन का संकल्प लें।
​आंखों का ख्याल: अगर आंखों में जलन ज्यादा हो, तो गुलाब जल का प्रयोग करें और अभ्यास रोक दें।

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