: "100 करोड़ हनुमान चालीसा - तब देते हैं हनुमान जी साक्षात दर्शन"
1. प्रस्तावना: कलियुग में सबसे सुलभ देवता
तुलसीदास जी ने लिखा है: "कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा।" और कलियुग में सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं - संकटमोचन हनुमान।
पर प्रश्न उठता है: करोड़ों लोग हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, फिर दर्शन सबको क्यों नहीं होते? उत्तर है - संख्या नहीं, निष्ठा और समर्पण। शास्त्र और संत कहते हैं कि जब 100 करोड़ हनुमान चालीसा का जप पूर्ण श्रद्धा, नियम और ब्रह्मचर्य से होता है, तो हनुमान जी भक्त को साक्षात दर्शन देकर कृतार्थ करते हैं।
यह लेख उसी महासाधना की विधि, रहस्य और अनुभव की कथा है।
2. 100 करोड़ संख्या का रहस्य
100 करोड़ क्यों?
ब्रह्मांड की संख्या: हनुमान जी 11 रुद्रों के अवतार हैं। 11 x 9 करोड़ = 99 करोड़। 1 करोड़ गुरु-दक्षिणा। कुल 100 करोड़ से 11 रुद्र प्रसन्न होते हैं।
श्वास का गणित: मनुष्य एक दिन में 21,600 श्वास लेता है। 100 करोड़ चालीसा = जन्म-जन्म के श्वास शुद्ध।
कलियुग का कोटा: कलियुग में पाप बहुत भारी है। 100 करोड़ चालीसा से संचित पाप भस्म होते हैं, तब निर्मल मन में हनुमान प्रकट होते हैं।
तुलसीदास जी को हनुमान जी के दर्शन तब हुए जब उन्होंने अखंड रामनाम के साथ चालीसा का कोटि-कोटि पाठ किया था।
3. कथा: भक्त सूरदास को दर्शन
500 साल पहले मथुरा में सूरदास नाम का अंधा भक्त रहता था। गरीब, पर राम-भक्त। एक बार डाकुओं ने उसका सब कुछ लूट लिया। सूरदास रोया: "बजरंगबली, क्या यही फल है तेरी भक्ति का?"
रात को स्वप्न में हनुमान जी बोले: "सूरदास, तू 40 साल से रोज 108 चालीसा पढ़ता है। संख्या 15 लाख हुई। दर्शन 100 करोड़ पर होंगे। संकल्प ले।"
सूरदास ने घर-बार त्याग दिया। यमुना किनारे गुफा में आसन लगाया। नियम लिया:
रोज 1008 हनुमान चालीसा - सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक
आहार: केवल तुलसी दल और यमुना जल
मौन: सिर्फ चालीसा, कोई बात नहीं
सेवा: हर पूर्णमासी को बंदरों को गुड़-चना
परीक्षाएँ आईं:
20 करोड़ पर: शरीर सूखकर काँटा हुआ। यमराज लेने आए। सूरदास ने चालीसा नहीं रोकी। यम बोले: "तेरा समय अभी नहीं। हनुमान का वचन है।" यम लौट गए।
50 करोड़ पर: माया ने सुंदर स्त्री का रूप धरा। बोली: "आँखें दूँगी, युवा कर दूँगी।" सूरदास बोले: "मुझे बाहरी आँख नहीं, भीतरी दर्शन चाहिए।" माया हारी।
90 करोड़ पर: अहंकार आया - "मैं सबसे बड़ा भक्त।" उसी रात ज्वर चढ़ा, वाणी बंद। 3 दिन चालीसा रुक गई। सूरदास फूट-फूटकर रोया: "बजरंगी, माफ कर। मैं तो तेरा दास।" अहंकार टूटा, वाणी लौटी।
4. 100 करोड़ पूर्ण और महादर्शन
जब 100 करोड़वाँ हनुमान चालीसा पूरा हुआ - "तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महँ डेरा" - गुफा लाल सिंदूरी प्रकाश से भर गई।
गदा की आवाज आई। सूरदास के सामने पर्वत जैसे विशाल, स्वर्ण मुकुट पहने, लाल लंगोट, कानों में कुंडल, मुख पर राम-नाम - हनुमान जी साक्षात खड़े थे।
हनुमान जी बोले: "सूरदास, आँख खोल।" सूरदास बोला: "प्रभु, मुझे बाहरी आँख नहीं चाहिए। मैं तो भीतर देख चुका।" हनुमान जी हँसे और बोले: "जिसने 100 करोड़ बार मेरा नाम लिया, उसके लिए असंभव कुछ नहीं।" उन्होंने कमंडल से जल छिड़का। सूरदास की दोनों आँखें ज्योति से भर गईं। पहले दर्शन हनुमान जी के, फिर सारी सृष्टि के।
वरदान माँगा: "प्रभु, कलियुग के लोगों के लिए सरल कर दो।" हनुमान जी बोले: "जो 100 करोड़ न कर सके, वो 108 रोज करे, मंगलवार व्रत रखे, और 'राम दुआरे तुम रखवारे' पर विश्वास रखे - मैं उसके संकट भी हरूँगा। पर 100 करोड़ वाला मेरा सखा बन जाता है।"
5. 100 करोड़ हनुमान चालीसा की विधि
अगर कोई संकल्प लेना चाहे तो नियम:
शुरू करने से पहले:
हनुमान जी के सामने गुरू से संकल्प लें। बिना गुरु न करें
ब्रह्मचर्य, सत्य, मांस-मदिरा त्याग अनिवार्य
लाल वस्त्र, कुश का आसन, देशी घी का दीपक
दैनिक नियम:
संख्या: कम से कम 108, अधिकतम 1008 रोज। 1008 से 100 करोड़ = 2 लाख 72 हजार दिन = 745 साल। इसलिए ग्रुप में करें। 1000 लोग रोज 108 करें तो 3 साल में पूर्ण।
समय: ब्रह्म मुहूर्त 4-6 बजे सर्वोत्तम।
ध्यान: हर चालीसा से पहले 1 बार "राम" नाम। हनुमान जी राम के बिना नहीं आते।
भोग: गुड़-चना, बूंदी, तुलसी दल।
सेवा: मंगलवार-शनिवार बंदर, गरीब, रोगी की सेवा। हनुमान जी सेवा में प्रकट होते हैं।
क्या न करें:
गिनती का अहंकार। गिनती हनुमान जी रखें, तुम प्रेम रखो
बीच में नियम तोड़ना। टूटे तो प्रायश्चित कर फिर शुरू
फल की इच्छा। "दर्शन दो" भी माँगना लोभ है। बस कहते जाओ: "तुम्हारी इच्छा।"
6. दर्शन कैसे होते हैं? संतों के अनुभव
नेमिचंद जैन, 1998: 60 साल में 100 करोड़ पूर्ण। बताया - "दर्शन स्वप्न में नहीं, जागते में हुआ। गदा की आवाज से नींद खुली। सामने 8 फुट के हनुमान। 3 मिनट रहे। बोले - 'डर मत।' शरीर 1 महीने तक सुगंध देता रहा।"
माता कर्माबाई: 40 साल की साधना। दर्शन के समय हनुमान जी बाल रूप में आए। गोद में बैठे। बोले - "माँ।"
निष्कर्ष: दर्शन सबको अलग होते हैं। किसी को वानर रूप में, किसी को ब्राह्मण रूप में, किसी को सिर्फ सुगंध और सिंदूर की वर्षा के रूप में। पर पहचान एक - उसके बाद कोई भय, कोई संकट नहीं रहता।
7. कलियुग के लिए सरल विकल्प
100 करोड़ हर कोई न कर सके तो तुलसीदास जी का उपाय:
"संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा"
रोज 7 बार: सुबह नहाकर 7 बार हनुमान चालीसा। 1 साल में 2555 पाठ। 40 साल में 1 लाख।
सुंदरकांड: मंगलवार को 1 सुंदरकांड = 100 चालीसा का फल।
अखंड पाठ: हनुमान जयंती पर 24 घंटे का अखंड चालीसा ग्रुप में। 10,000 पाठ एक दिन में।
नाम जप: "राम राम" जपो। हनुमान जी वहीं आते हैं जहाँ राम नाम है।
सबसे बड़ा मंत्र: "राम काज कीन्हे बिना मोहि कहाँ विश्राम।" अपना काम राम का काम समझकर करो। वही 100 करोड़ चालीसा है।
8. अंतिम बात: दर्शन से बड़ा क्या?
हनुमान जी दर्शन देकर चले जाते हैं। पर जो "सब पर राम तपस्वी राजा" मान ले, उसके हृदय में हनुमान सदा बसते हैं। 100 करोड़ का लक्ष्य दर्शन नहीं, "दास बनना" है।
जब तुम कह सको - "मेरा कुछ नहीं, सब राम का, सब हनुमान का" - उसी दिन 100 करोड़ पूरे।
जय बजरंगबली। जय श्री राम।
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