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मां बगलामुखी का यंत्र विशेष रूप से न्यायिक मामलों, शत्रु बाधा और जीवन में उन्नति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

सतयुग के एक अद्भुत प्रसंग में जब समस्त सृष्टि भीषण तूफान से कांप उठी, तब स्वयं भगवान विष्णु भी चिंतित हो उठे। प्रकृति का संतुलन डगमगाने लगा था, तब उन्होंने सौराष्ट्र क्षेत्र में हरिद्रा सरोवर के तट पर कठोर तपस्या आरंभ की। उसी तप के तेज से उस पवित्र सरोवर से प्रकट हुईं अद्भुत शक्ति की अधिष्ठात्री देवी — मां बगलामुखी। हरिद्रा अर्थात हल्दी, इसलिए मां के वस्त्र, पूजन सामग्री और साधना का प्रत्येक तत्व पीले रंग में ही प्रतिष्ठित होता है।

तंत्र शास्त्रों में वर्णित दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट और प्रभावशाली माना गया है। काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला — इन सभी में मां बगलामुखी वह शक्ति हैं जो शत्रु के वचन, बुद्धि और गति को स्थिर करने की सामर्थ्य रखती हैं। यही कारण है कि इन्हें स्तम्भन शक्ति की देवी कहा जाता है।

साधना के समय साधक को अत्यंत अनुशासन में रहना होता है। ब्रह्मचर्य का पालन, पीले वस्त्रों का धारण, संयमित आहार और रात्रि के गूढ़ समय में मंत्र जाप — यह सब साधना को सिद्धि की ओर ले जाता है। साधना का समय रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे के मध्य सबसे प्रभावी माना गया है, जब वातावरण सूक्ष्म शक्तियों से परिपूर्ण होता है। दीपक की बाती तक को हल्दी में रंगकर उपयोग करना इस साधना की विशिष्टता को दर्शाता है।

मंत्र सिद्धि के लिए चने की दाल से निर्मित यंत्र का पूजन किया जाता है, और यदि संभव हो तो ताम्रपत्र या रजत पत्र पर इसे अंकित कर स्थापित किया जाता है। यह केवल एक पूजन विधि नहीं, अपितु ऊर्जा के केंद्र को जागृत करने की प्रक्रिया है।

ऋषि नारद द्वारा स्थापित इस ब्रह्मास्त्र विद्या का विनियोग, आवाहन और ध्यान साधक को देवी के साक्षात् सान्निध्य में ले जाने का माध्यम बनता है। ध्यान में मां बगलामुखी को स्वर्णमयी आभा से युक्त, त्रिनेत्रधारी, पीताम्बर वस्त्रों में, हाथों में गदा, पाश और वज्र धारण किए हुए, त्रिलोक को स्तम्भित करने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है।

उनका 36 अक्षरों वाला यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली और गूढ़ माना गया है —
ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

इस मंत्र के एक लाख जप से साधना की सिद्धि प्राप्त होती है, और पूर्णता के पश्चात दशांश यज्ञ तथा तर्पण करना अनिवार्य माना गया है। अधिक उच्च सिद्धि के लिए पांच लाख जप तक का विधान भी बताया गया है।

मां बगलामुखी का यंत्र विशेष रूप से न्यायिक मामलों, शत्रु बाधा और जीवन में उन्नति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यह केवल एक आध्यात्मिक साधन नहीं, अपितु ऐसी दिव्य शक्ति का केंद्र है जो साधक के चारों ओर सुरक्षा और विजय का कवच निर्मित करता है।
जो साधक श्रद्धा, नियम और पूर्ण विश्वास के साथ इस साधना को करता है, उसके लिए असंभव भी संभव हो जाता है।

नमामीशमीशान 
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